अय्यारी

 मन बैरागी, तन अनुरागी, क़दम-क़दम दुश्वारी है

जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फ़नकारी है

औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में

कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है




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  1. https://drive.google.com/file/d/1lEYxas8GkMGehe9nOdCqcag8jdR2-bf0/view?usp=sharing

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