शायद मेरे ही नसीब में नहीं है मोहब्बत...💔
जब भी कही दिल लगता है, जितनी बार कोई भरोसा दिलाता है, जब भी किसी पर भरोसा होने लगता है, हर बार खुद को बेबस ही पाता हूँ मैं. याहा मोहब्बत चाहिए सब को पर देना कोई नहीं चाहता, ये जब तक चाहते हैं, जब तक मन होता है, ये जब तक इंटरेस्ट होता है, परवाह भी तब तक करते है, और ना जाने क्यों, एक वक्त के बाद इरेटेट होने लगता है. और बात बस मोहब्बत तक सीमित नहीं थी, दोस्ती में भी हर कोई मतलब का दिखा, बस अपने मतलब तक साथ रहे, कोई एक न दिखा जिसे दिल से लगन हुई हमसे. समझ नहीं आता नसीब मेरा खराब है या मैं ही लोगो को परखने में हर बार भूल कर बैठाता हूं इतना ठोकर खा के भी ये पता नहीं चल पाता की कौन सही है और कौन गलत। बस एक छोटी सी चाहत थी की कोई हो जिसके लिए हम जरूरी हो, जो हमारी परवाह करे और प्यार करे, पर अब ऐसा लगता है की शायद दुनिया का सबसे मुश्किल काम ही यही है... ...